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भावनाएं तो लड़कों की भी होती हैं!

'अगर कोई लड़की किसी लड़के को थप्पड़ मरती है तो समाज कहता है कि पक्का लड़के की ही गलती होगी, लेकिन एक लड़का किसी लड़की को थप्पड़ मारता है तो समाज कहता है कि कितना जालिम मर्द है। हम हमेशा लड़के को ही गलत ठहराते हैं, ये जरूरी नहीं कि हमेशा एक लड़का ही गलत हो।' ये एतराज फिल्म में कारीना कपूर का डॉयलॉग है।

ये सोच शायद आज भी है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। सारे लड़के और सारी लड़कियां एक जैसे नहीं होते। अगर कोई लड़का कुछ गलत करता है तो सारे समाज को उसे गलत नहीं ठहराना चाहिए। वहीं अगर कोई एक लड़की कुछ गलत करती है तो सारी लड़कियों को गलत नहीं समझना चाहिए। हम हमेशा लड़कियों के अधिकार के ही बारे में बात करते हैं। उनकी ही भावनाओं के बारे में सोचते हैं।

अधिकतर लोगों को पता है कि 8 मार्च को विश्व महिला दिवस मनाया जाता है, लेकिन कितने लोगों को पता है कि 19 नवम्बर को विश्व पुरुष दिवस मनाया जाता है। पुरुष भी अपने चाहने वालों से और जिन्हे वे चाहते हैं उनसे बहुत कुछ की उम्मीद रखते हैं। उन्हें भी सराहना और समय की जरूरत होती है।

लड़कों के मन में जो भी होता है, अच्छा-खराब बोल देते हैं। दोस्तों के साथ भी उनसे अच्छी दोस्ती शायद ही कोई और निभाता होगा। वो समय-समय पर सारे रिश्ते निभाते हैं। वे अक्सर अपना दुःख किसी से नहीं बताते। वे सोचते हैं कि कहीं मेरी परेशानी की वजह से कोई और परेशान ना हो जाए। अक्सर अपना दुःख लड़के अपने में ही रख लेते हैं।
 
वे दिल की बात कहने में संकोच नहीं करते, वो कभी नहीं सोचते कि सामने वाली मेरे बारे में क्या सोचती है, वो मुझे हां करेगी या नहीं, मुझे अपनाएगी या नहीं। वे बस सही समय आने पर अपने प्यार का इजहार कर देते हैं। अक्सर लोगों को लगता है कि मर्द को 'दर्द और डर' नहीं होता। लेकिन वो अपने चाहने वालों को और जिन्हे वो चाहते है उन्हें खोने से डरते हैं। उन्हें दर्द भी होता है बस ये अलग बात है कि वे अपने 'दर्द और डर' को चेहरे पर नहीं आने देते।

अक्सर लोग सोचते और कहते हैं कि लड़के बहुत गुस्सा करते हैं। हां ये सच है कि ये कभी-कभी गुस्सा करते हैं, लेकिन कुछ क्षण के बाद ये आपके पास आकर खुद ही आपको समझाएंगे... सॉरी बोलेंगे। फिर आपको खुद ही समझ में आ जाएगा कि वे कभी-कभी गलती से गुस्सा करते हैं, लेकिन उनके मन में ऐसा कुछ नहीं होता। दिल से वे साफ होते हैं।

हमें ये सोचना होगा और सोचना भी चाहिए कि उनका भी एक मत होता है...उनकी भी अपनी एक राय होती है... उनकी भी अपनी एक भावना है। हमें भी उनकी भावनाओं के बारे में सोचना चाहिए। वे दूसरों के लिए बहुत कुछ करते हैं। स्वरिमा तिवारी ने ठीक ही कहा है कि- कहने को स्त्री कोमल है और पुरुष मजबूत... पर एक स्त्री, पुरुष के भावुक पक्ष से और पुरुष, स्त्री के मजबूत पक्ष से सबसे अधिक आकर्षित होते हैं।

-भावना भारती
एमिटी यूनिवर्सिटी

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